संस्थापक
हमारे प्रेरणास्रोत एवं शिक्षण यात्रा के पथप्रदर्शक

स्वर्गीय मुन्नालाल मौर्य जी
“ऐसे ही विलक्षण पुरुष एक ज्योतिमान रत्न थे”
अमूल्य रत्नों से परिपूर्ण भारत वसुंधरा का अंचल कितना पवित्र, कितना सौभाग्यशाली और कितना अनोखा है यह किसी से छिपा नहीं है। यह भूमि अपने अंचल में जहाँ असंख्य मणिमुक्ताएँ छिपाए बैठी है, वहीं समय-समय पर ऐसे नवतरुण उत्पन्न हुए हैं जिनकी जीवन ज्योति से जगततल जगमगा उठा।
जिन्होंने चट्टान बनकर समय का प्रवाह रोक दिया, जो अपने लिए नहीं वरन् प्रदेश और देश के लिए जिए, जिनके पवित्र तेज के समक्ष समस्त अमानवीय विचारों ने घुटने टेक दिए।
ऐसे ही भारत माता के ये अनमोल पुत्र स्व० मुन्नालाल मौर्य जी थे। इन्होंने अपने जीवन से शिक्षा, संस्कृति, समाज और मानवीय मूल्यों का संरक्षण किया। इन्हीं आदर्शों से प्रेरित होकर आज भी संस्था सफलता के पथ पर अग्रसर है और इनके जीवन की दिव्य ज्योति सदैव प्रेरणा देती रहती है।
